लिखूँ या न लिखूँ
तुम कहाँ पढ़ोगे?
दर्द है, यह सच है
तुम कहाँ देखोगे?
जो खुद नहीं देखा
उसे किसी तीसरे से क्या कहोगे?
आह की आवाज़ होती तो सुनते,
दिल की पीर तुम कहाँ सुनोगे?
और जब तक तुम
पढ़ोगे, देखोगे, बोलोगे, सुनोगे—
तब तुम
उसे इस धरा पर न पाओगे।
Comments
Post a Comment