नारी तुम तो नारी हो,
न अबला न बेचारी हो।
लक्ष्मी हो तुम, तुम ही विद्या हो,
तुम ही नवदुर्गा शक्ति स्वरूपा हो।
जिंदगी का आरंभ तुमसे,
जिंदगी का अंत तुम हो।
इक मकान का मालिक होता है पुरुष पर,
उसको घर बनाने का मंत्र, नारी तुम हो।
तुम न अपनों से हारी हो,
न तुम अपने सपनों की मारी हो।
तुम हर काम की शुरुआत हो
और तुम हर जंग की तैयारी हो।
नारी तुम तो नारी हो।
ये जो बोला सब सच है क्या,
क्या इसमें रत्तीभर का भी झूठ नहीं?
सच बताओ तुम सर्वेसर्वा हो इस जग की या
इस तेरे जग में, तेरे घर में तेरी कोई पूछ नहीं।
एक बार मनन करके देखो,
जैसा कहती हूँ वैसा करके देखो -
एक बार सुंदर-सुकुमल बनना,
तुम देखना, तुम तब भी कुचली जाओगी।
फिर सबल सुदृढ़ बनकर देखना,
तुम तब भी ताने पाओगी।
साल भर रोने वाली तू नारी
तुम कुछ नहीं बस भोली हो!
तुम्हें हर मज़ाक में सिरदर्द कहने वालों की
तुम हर मर्ज की गोली हो।
तुम घर की लाज शर्म हया हो,
तो कभी दिल बहलाने वाली अदा हो।
कभी सात फेरों की वफ़ा हो,
तो कभी घर बचाने वाली सदा हो।
तुम जिम्मेदारी उठाने वाला कांधा हो,
तुम बॉस की फटकार निकालने का जरिया हो।
तुम कभी उसकी गलतियों का पुतला हो,
तो कभी उसके लिए प्रेम का दरिया हो।
'क्या तेरा क्या मेरा' कहने वाले कहते हैं
घर उसका है पर उसकी जिम्मेदारी तेरी है।
रुतबा है तो उसका है और बेकारी है तो वो तेरी है।
उसकी शराब दोस्ती है, अय्याशी है तो वो तेरी है।
फिर कहता है बुरा मत मान डार्लिंग तू तो जान सिर्फ मेरी है।
नारी दिवस के चक्कर में
पीड़ा अपनी भूल जाती हो।
तुम ही बताओ अपने जीवन भर में
तुम कितने दिन नारी दिवस के फूल पाती हो?
आखिर इस एक दिवस पर तुम ऐसा क्या पा जाती हो,
जो इमोजी के फूलों पर तुम इतना इतराती, मुस्कुराती हो।
क्या जीवनभर सुरक्षा सम्मान का वादा तुझे मिल पाता है?
या बस इनके झूठे दावों पर तुम मोम सी पिघल जाती हो?
जब तक टैक्सी, बस, स्कूल, अस्पताल, घर, पड़ोस में
एक भी निर्भय नारी परिवर्तित हो निर्भया होगी।
शब्दों से नहीं दिल से कहती हूँ ,
मुझ अबला नारी को नारी दिवस की,
कोई भी शुभकामना कुबूल न होगी...
कोई भी शुभकामना कुबूल न होगी...
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