आज हर गली मोहल्ले में बहुत शोर है, हर गली कोई हत्यारा, तो कोई चोर है। किताबों में नैतिकता भरी है कूट कूट कर और हकीकत में अनैतिकता का दौर है। कोशिश तो बहुत की हमने अपने जज़्बात रखने की, पर कोशिश गर दूसरे को समझने की की होती... तब बात कुछ और होती! हर रिश्ते की एक मर्यादा होती थी पहले पर अब जाने वो कहां खो गई हैं। रिश्ता हो या आंख हो कोई , सब जाने अनजाने बेदम सी हो गई हैं। कोशिश तो बहुत की हमने हमेशा मुस्कुराने की, पर कोशिश गर दूसरे की मुस्कान बनने की की होती... तब बात कुछ और होती! आगे बढ़ने की कोशिश हरदम की, और अपनों से आज़ादी की लड़ाई में मर गए। आज़ाद होकर अपने वज़ूद के लिए लड़े, और देखते देखते खुद को अकेला कर गए। कोशिश तो बहुत की हमने अपना वज़ूद बचाने की, पर चिंता गर दूसरे के वज़ूद की की होती... तब बात कुछ और होती! मकान बना लिए महलों की तरह, और उनको रिश्तों की जगह पुतलों से सजा लिया। अपनी उलझनों में उलझे इस क़दर कि अपनों को ही अपना दुश्मन बना लिया। कोशिश तो बहुत की हमने दुश्मन मिटाने की, पर कोशिश गर रिश्ते बचाने की की होती... तब बात कुछ और होती! बेटी बनी तो मां से शिकायत रही, मां बनी...