जहां एक पल नहीं कट रहा
वहाँ तीन साल बिताना मुमकिन नहीं लग रहा।
मैं मुस्कुराती तो हूँ पर बस दर्द छुपाती हूँ,
इस तरह यह दर्द भी नहीं बँट रहा।
कोई किसी जादूगर को बुला दो,
मुझे मेरी पहचान भुला दो।
या मुझे किसी ख्वाब में ले जाकर
मेरी रूह को ही सुला दो।
मेरे दर्द को मेरी
रूह भी भांप चुकी है,
इसकी सिहरन से मेरी
साँसें भी काँप चुकी हैं।
अब जीवन जीवन नहीं रहा,
न खुशी खुशी रह गई है।
आई थी आज फिर अश्कों की टोली,
जो मुझे उनकी परम सखी कह गई है...
जो मुझे उनकी परम सखी कह गई है...
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