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गर्मी में टिप-टॉप?

मुझे नहीं पता गर्मी में हर वक्त कैसे टिप-टॉप रहा जाता है।

झूठ नहीं कहूंगी मुझे तो बहुत पसीना आता है।

सब्जी बनाने में तो बीच-बीच में पसीना सुखा लेती हूं,

पर रोटी बनाने में मेरा दम निकल जाता है।

मुझे पता नहीं इस गर्मी में हर वक्त कैसे टिप-टॉप रहा जाता है।


माना पाउडर थोड़ी देर को ठंडी सी जलन देता है,

माना कूलर ए.सी. कमरे को स्वर्ग बना देता है।

पर मैं पहले गृहिणी ही थी अब कामकाजी भी हूं,

कूलर ए.सी. मेरे कदमों से कदम मिलाकर चल नहीं पाता है।

मुझे पता नहीं इस गर्मी में हर वक्त कैसे टिप-टॉप रहा जाता है।


सिर धोया है या पसीने से भीगा है,

इन घने मुलायम केशों को भी समझ नहीं आता है।

पल भर को शरबत की ठंडाई से मिलती है ठंडक,

पर दो पल के बाद गला फिर से मरुस्थल सा बन जाता है।

मुझे पता नहीं इस गर्मी में हर वक्त कैसे टिप-टॉप रहा जाता है।


आजकल धूप में सुखाएं कपड़े जिस तरह पल भर में सूख जाते है,

उसी तरह पहना हुआ कपड़ा भी पलभर में भीगकर गिज़गिजाट पाड़ जाता है।

स्टाइल में अंग्रेजी कैसे बोलूं, हिंदी में भी पहाड़ी घुस आई है,

कोई कहेगा कैसी महिला है, हिंदी लिखना पढ़ना भी नहीं आता है।

मुझे पता नहीं इस गर्मी में हर वक्त कैसे टिप-टॉप रहा जाता है।


फल खाकर, पानी जूस पीकर जिंदा रह सकती हूँ मैं,

पर खाना मुझे पकाना पड़ ही जाता है।

बाहर बैठ खाने का इंतजार करने वाला क्या जाने,

एक मां का दिल किचन में जाने से डर जाता है।

मुझे पता नहीं इस गर्मी में हर वक्त कैसे टिप-टॉप रहा जाता है।


कपड़े धोने लगो तो पसीने से टब भर जाता है,

मांग का सिंदूर बहकर नाक तक आ जाता है।

न झाड़ू-पोछा लगाने का मन है, न मुझे बर्तन धोना है

सच है ये कि ये गर्मी है, मुझे बहाना बनाना नहीं आता है।

और सच यह भी है कि मुझे पता नहीं इस गर्मी में हर वक्त कैसे टिप-टॉप रहा जाता है...

मुझे पता नहीं इस गर्मी में हर वक्त कैसे टिप-टॉप रहा जाता है...



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