कुछ पल बिता लूं जो अपने संग
कुछ पल जी लूं जो अपने रंग,
कुछ पल की जीत लूंगी मैं जंग,
बाकी पलों का होगा क्या ढंग।
कोई बता दो।
कुछ पल सज लूंगी मैं,
कुछ पल असज रह लूंगी मैं,
कुछ पल मैं बन जाऊंगी मैं
बाकी पल कौन होंगी मैं?
कोई बता दो।
कुछ पल हसूंगी,
कुछ पल चुप रहूंगी।
कुछ पल खामोश होकर भी कुछ कहूंगी,
बाकी पल बोलकर खामोश कैसे रहूंगी?
कोई बता दो।
कुछ अपना सा यहां दिखता नहीं है,
कुछ बेगाना है यह भी पता नहीं है।
कुछ पल को भी कोई पल टिकता नहीं है,
बाकी पल कैसे खरीदूं कोई पल बिकता नहीं है?
कोई तो बता दो।
कोई तो बता दो
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