मेरे देश की मैं क्या तारीफ करूं यहां नदियां देवी सी बहती हैं। यहां जन्मे कई भगत सिंह और कलाम, और गली गली में लक्ष्मी नीरजा रहती हैं। मेरे देश की मैं क्या तारीफ करूं यह पूरी दुनिया का संगम है। मेरी मां पर आंख उठा दे कोई किसमें कहां ऐसा दम है। मेरे देश की मैं क्या तारीफ करूं है राधा-कृष्ण का प्यार यहां। यह अमन प्रेम की नगरी है, है कुटिल मन का संहार यहां। इस माटी की हवा भी हमें पल-पल याद दिलाती है। यह सांगा प्रताप की भूमि है, यह भय से नहीं, रक्त से पूजी जाती है। तीन रंग का हमारा तिरंगा हमारे जज्बातों की कहानी है । यह यूं तो शीतल जल की धारा है, यह यूं तो ममता का आंचल सारा है, यह यूं तो धर्मों का आलिंगन है, यह यूं तो बुद्धि मतों का चिंतन है। पर वक्त पड़े तो, पर वक्त पड़े तो यह वीरों की रवानी है। जो देश प्रेम पर मर मिट जाए ऐसी इस देश की जवानी है। मैं भी हाड़ मांस का पुतला हूं पर मुझे सियाचीन न गला पाया। सब पैंतीस डिग्री से डरते हैं पर मुझे बाड़मेर भी न जला पाया। धन्य हूं मैं मैंने ऐसे देश में जन्म पाया, इसका प्यार मेरी रगों में लहू ब...