बाल दिवस की एक सभा हर साल सजाई जाती है, कुछ उत्सव सा होता है ढेरों तालियां बजाई जाती है। जन्मदिवस किसका है सभी को बताया जाता है, सभी जनों को इसी दिवस पर उनका ख्याल आता है। अब उनकी बात मैं तुमको नहीं बताती हूँ, बाल दिवस पर बाल जनों की गाथा तुम्हें सुनाती हूं। बाल समय सूरज निगल जग में घोर अंधकार किया, बालपन में कितने ही योजन को हनुमान ने पार किया। बाल समय में पूतना मारी, कंस का संहार किया, बालपन में श्रीकृष्ण ने जग पर बहुत उपकार किया। सीता के लालन-पालन का लोहा, लव कुश के शौर्य पराक्रम से माना जाता है। नचिकेता एक छोटा सा बालक था तब से दुनिया का पहला जिज्ञासु जाना जाता है। जिस प्रकार फलदार वृक्ष की पहचान , माली को पौधे के बचपन से ही हो जाती है। उसी तरह आपके कल की झलक आपके बचपन से ही हो जाती है। पूत के पांव पालने में ही दिख जाते है, ऐसा सबने सुना होगा। सर्वप्रसिद्ध यह मुहावरा यूहीं नहीं बना होगा। एक शिक्षिका हूँ, एक मां भी हूँ, तुम सब यहां बाल समान मेरे, इस बाल दिवस पर एक विनती तुमसे करना चाहती हूँ, बालपन के सभी गुणों को जानो, अपनी क्षमता को पहचानो, किसी से खुद को कम न जानो। निर्मल गुण...