आज गुरुजनों के सानिध्य में बिताए कुछ पलों में ऐसी शांति मिली कि बहुत दिनों बाद जीवन को समझने को कुछ पल मिल गए। गुरु छाया मुझ पर सदैव बनी रहे। ❤️❤️ प्रणाम व आभार। यह निर्मल सरिता जो बह रही है, कुछ तो है जो यह मुझसे कह रही है। फुर्सत इसे समझने की आज मिली है, मुझ तुच्छ मनुष्य की यही तो संगदिली है। पहली बात - कभी यह शोर मचाती है , कितनी ताकत है इसमें दर्शाती है। उस पल इसे देखना, ए दोस्त! अपनी रजतसदृश चमक से सूरज को भी पछाड़ जाती है। तब यह हुंकार भरती है, चुनौतियों से प्यार करती है। उस पल मानो राह की शिला भी पसीना पसीना हो इससे डरती है। माँ समतुल्य सरिता मुझको सिखा रही थी, डरना नहीं मेरे लाल, चुनौती की किसी शिला से मैं जो चुल्लू में नहीं समा सकती मुझे भी बिना टकराए कभी रास्ता नहीं मिला रे... कभी रास्ता नहीं मिला रे.... दूसरी बात - अब कहीं यह खामोश रहती है यूं लगता है कि कितनी सरलता से बहती है। पर उस हर पल में भी कुछ तो है जो यह सहती है, पर मेरे मित्रों! वो यूहीं चुपचाप नहीं रहती है। तुम समझ न सके पर वो - कभी हंसती , कभी रोती है। कभी वो दिन रात जगती है, कभी...