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अब तभी लता जैसा कोई दोबारा होगा....

बुरी लगे बात तो सिरे से नकार देना,

अच्छी लगे तो मेरे हुनर को भी प्यार देना।

कोई अभिनय कर गया, कोई गाकर चला गया,

इस भीड़ में कुछ कहने का मुझे भी अधिकार देना।


आज दीदी के जाने पर नम थी कई आँखें,

बुरा लगा मुझे भी कि स्वर-कोकिला की रुक गई साँसे।

पर उम्र का आईना देखा तो वह एक अच्छी उम्र जी चुका था,

आप ही बताओ, क्या दिखते नहीं आपको कभी कच्ची उम्र के जनाज़े।


उन प्राणों को चाहने वाला तो यहां कभी कोई था भी नहीं,

प्यार तो सबको बस उनके सुरों की धारा से था।

क्या कहा! गलत कह रही हूं,

गलत कह रही हूं तो बताओ कि,

क्या स्वर कोकिला का बचपन कभी बेसहारा न था?


इंसानी जान की कीमत तो यहां पहले भी न थी यारों,

वर्ना कभी कोई कत्लेआम न होता, न होता कोई दंगा फसाद।

हर जिंदगी उम्र रहते होती मुकम्मल और,

उम्र जल्दी खत्म होने वालों की भी न होती इतनी तादाद।


लता मंगेशकर को चाहने वाले कई हैं यहां,

पर क्या कोई है जिसने बस लता को चाहा था।

गर ऐसा कोई होता तो लता दोबारा लता बनना चाहती,

पर आपको भी पता है लता ने ऐसा कुछ न चाहा था।


मेरे यारों जब हर जनाज़े का सभी को एक-सा गमेमर्ज़ होगा,

जब हर लता की तकलीफों का सभी को एक-सा दर्द होगा,

जब हर वृक्ष की हर शाख से लता को सहारा होगा,

यकीन मानो मेरे यारों तभी,

अब तभी लता जैसा कोई दोबारा होगा....

अब तभी लता जैसा कोई दोबारा होगा.....




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