' व्यस्त है आदमी ' व्यस्त है आज आदमी धन कमाने में , खुद की खुशी से, खुद की खुशी को, खुद से भुलाने में | कहा नहीं उसको किसी ने कि - तो शमा की तरह जल, पर शौक है तेरा खुद अपनी व अपनों के भावों की चिता जलाने में | तू व्यस्त है आज खुद, खुद की बसाई बस्ती मिटाने में ...... इस तरह व्यस्त है आदमी खुद, खुद की हस्ती मिटाने में ....... माना आज तेरा सारा काम मशीनें करती हैं , ...