जिंदगी गलत हो न हो पर, गलतियों से जरूर भरी होती है। वो बात अक्सर बुरी ही लगती है, जो सच्ची और खरी होती है। जिंदगी और कुछ नहीं बस, कुछ गलतियों का पुलिंदा है। आज जो गलतियां करता है, समझो बस वही हकीकत में जिंदा है। इत्तेफाक नहीं रख कर मुझसे तुम कहोगे- "क्यों जिंदगी गलतियों का पुलिंदा है?" कैसी बात करते हो तुम मतवाले, यह और कुछ नहीं, यह तो बस जिंदगी की निंदा है। इस बात पर मेरा जवाब बस कुछ यूं रहेगा, क्या कोई काम ऐसा है जिसको कोई कभी गलत न कहेगा। तेरा हितैषी तेरा होगा तो तेरे गलत काम को गलत कहेगा, तेरा हितैषी बैरी होगा तो तेरे सही काम को भी गलत ही कहेगा। तेरा बैरी कभी हितैषी न होगा, और हितैषी सदा हितैषी न रहेगा, अब तू बता मुझे ओ ! मेरे दोस्त ! तू जिंदगी को क्या कहेगा....... तू जिंदगी को क्या कहेगा.......