काहे को आज का यह झूठा प्रचार पसंद है सबको उसके हाथों का अचार, पर चुभते हैं सबको उसके आज़ाद विचार । पूरे घर को संभालने वाली वो, वो जो है वास्तव में बेघर लाचार । घर के भीतर आज भी जब कोई करता नहीं उसकी कर्त्तव्यपरायणता का आभार । फिर काहे को व्हाट्सऐप का दिखावा, काहे को आज का यह झूठा प्रचार । आज भी आवाज़ उठाने पर जिसे औकात बताई जाती है , जन्म लेते ही जो बेटी पराया धन बनकर रह जाती है। देर रात बाइक पर भाई को आते देख रोमांचित होती है वो , पर गर सांयकाल भी गहरा जाए तो घर वापस आने पर वो इतना घबराती है। आज भी डरती है वो कि कहीं उसकी अस्मिता पर न हो जाए कोई प्रहार। फिर काहे को व्हाट्सऐप का दिखावा, काहे को आज का यह झूठा प्रचार । बचपन में बाबुल की ऊंगली, लड़कपन में भाई का साथ। ब्याह बाद पति का संरक्षण, मरते दम तक चाहिए उसे कोई न कोई हाथ। जब इसी को कहते हो तुम उसकी सुकून भरी दुनिया संसार । फिर काहे को व्हाट्सऐप का दिखावा, काहे को आज का यह झूठा प्रचार । आज भी जिसका तकिया आंसूओं की नमी लिए...