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Showing posts from March, 2022

काहे को आज का यह झूठा प्रचार...

                           काहे को आज का यह झूठा प्रचार पसंद है सबको उसके हाथों का अचार, पर चुभते हैं सबको उसके आज़ाद विचार ।  पूरे घर को संभालने वाली वो, वो जो है वास्तव में बेघर लाचार । घर के भीतर आज भी जब कोई करता नहीं उसकी कर्त्तव्यपरायणता का आभार । फिर काहे को व्हाट्सऐप का दिखावा, काहे को आज का यह झूठा प्रचार । आज भी आवाज़ उठाने पर जिसे औकात बताई जाती है , जन्म लेते ही जो बेटी पराया धन बनकर रह जाती है। देर रात बाइक पर भाई को आते देख रोमांचित होती है वो , पर गर सांयकाल भी गहरा जाए तो घर वापस आने पर वो इतना घबराती है। आज भी डरती है वो कि कहीं  उसकी अस्मिता पर न हो जाए कोई प्रहार। फिर काहे को व्हाट्सऐप का दिखावा, काहे को आज का यह झूठा प्रचार । बचपन में बाबुल की ऊंगली, लड़कपन में भाई का साथ। ब्याह बाद पति का संरक्षण, मरते दम तक चाहिए उसे कोई न कोई हाथ। जब इसी को कहते हो तुम  उसकी सुकून भरी दुनिया संसार । फिर काहे को व्हाट्सऐप का दिखावा, काहे को आज का यह झूठा प्रचार । आज भी जिसका तकिया आंसूओं की नमी लिए...